
मिर्जापुर की सड़कों पर ‘सफेद जहर’ का काला कारोबार: क्या पुलिस की सक्रियता ही काफी है?
- मिर्जापुर बना ड्रग तस्करों का नया ‘हब’? 4.39 क्विंटल गांजे के साथ अंतरजनपदीय तस्कर गिरफ्तार
- पुलिस-STF की बड़ी कार्रवाई: क्या मिर्जापुर के रास्ते सप्लाई हो रहा था नशे का यह जखीरा?
- एनडीपीएस एक्ट के शिकंजे में तस्कर: 2.2 करोड़ के गांजे के साथ अंतर्राज्यीय गैंग का भंडाफोड़
मिर्जापुर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने मड़िहान में जिस तरह 2.2 करोड़ रुपये के गांजे के साथ एक अंतरजनपदीय तस्कर को दबोचा है, वह निश्चित रूप से एक बड़ी कामयाबी है। 4 कुंतल 39 किलोग्राम गांजा केवल एक बरामदगी नहीं, बल्कि उस गहरी होती खाई का सबूत है, जिसमें हमारी युवा पीढ़ी को धकेला जा रहा है।
सवाल सिस्टम और सुरक्षा पर
अमरजीत यादव उर्फ पहलवान का पकड़ा जाना एक चेहरे को बेनकाब करता है, लेकिन उन ‘मास्टरमाइंड्स’ का क्या जो पर्दे के पीछे से इस पूरे नेक्सस को चला रहे हैं? उड़ीसा से प्रयागराज और आसपास के जनपदों तक गांजे की यह ‘सप्लाई चेन’ रातों-रात नहीं बनी। इतने बड़े पैमाने पर ट्रक कंटेनर में नशीले पदार्थ की ढुलाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि तस्करों के हौसले कितने बुलंद हैं। क्या हमारे अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट और खुफिया तंत्र को भनक नहीं लगी कि एक ट्रक भारी मात्रा में नशा लादकर राज्य की सीमा में प्रवेश कर गया?
युवाओं के भविष्य पर प्रहार
गांजे की यह खेप केवल नंबरों का खेल नहीं है, यह हजारों घरों के चिराग बुझाने की तैयारी थी। ड्रग माफियाओं के लिए यह एक मुनाफे वाला कारोबार हो सकता है, लेकिन समाज के लिए यह एक ‘धीमा जहर’ है जो अपराध दर को बढ़ाता है और युवाओं की मेधा को नष्ट करता है। मिर्जापुर जैसे शांत जनपदों को तस्करों ने अपना ‘ट्रांजिट पॉइंट’ बना लिया है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।
कार्रवाई दिखावटी न हो
गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज होना तो केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। असली जीत तब होगी जब पुलिस इस मामले की तह तक जाकर उस पूरे गिरोह को ध्वस्त करेगी जो इस अवैध व्यापार को संरक्षण दे रहा है। गांजा तस्करों के खिलाफ ‘एनडीपीएस एक्ट’ का डंडा चलता तो है, लेकिन अक्सर बड़ी मछलियां जाल से बाहर निकल जाती हैं।
प्रशासन को अब एक सख्त ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की आवश्यकता है। केवल ट्रक सीज करने या एक तस्कर को जेल भेजने से ड्रग माफियाओं की कमर नहीं टूटने वाली। मिर्जापुर की धरती से यदि इस नशे के कारोबार को जड़ से मिटाना है, तो पुलिस को अपनी खुफिया सूचनाओं को और भी पैना करना होगा।
निष्कर्ष
मिर्जापुर पुलिस की यह कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन यह मात्र शुरुआत होनी चाहिए। जनता अब यह देखना चाहती है कि इस गांजा साम्राज्य का असली चेहरा कौन है? क्या पुलिस उन सफेदपोशों तक पहुंच पाएगी जिनकी शह पर यह ‘काला कारोबार’ फल-फूल रहा है? फिलहाल, तस्कर जेल में है, लेकिन समाज की निगाहें पुलिस की अगली चाल पर टिकी हैं।






















